kavitaayen aur anya srijan
फ़ॉलोअर
ब्लॉग आर्काइव
▼
2014
(4)
▼
सितंबर
(1)
कुछ और सोच बैठी
►
मार्च
(3)
►
2012
(3)
►
अक्टूबर
(1)
►
सितंबर
(1)
►
अगस्त
(1)
►
2011
(1)
►
सितंबर
(1)
►
2010
(2)
►
दिसंबर
(1)
►
जनवरी
(1)
►
2009
(6)
►
दिसंबर
(1)
►
अक्टूबर
(3)
►
सितंबर
(2)
मेरे बारे में
kamlesh sachdeva
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
samandar
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
samandar
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, 16 सितंबर 2011
जैसे मेरा मन
इक मुकाम ये भी है कि
गिले-शिकवे, चाहतें, राहतें -
सब पीछे छूट गए हैं
सामने है इक खुला आसमान -
गहरा नीला, चमकता
जैसे गहरा समंदर...शांत
जैसे मेरा मन
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)